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कौन है हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे, जिसे पकड़ने की कोशिश में डीएसपी समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गये ।।

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DP डेस्क: कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर अपराधियों ने घात लगाकर हमला किया. अपराधियों ने पुलिसवालों पर अंधाधुंध फायरिंग की. इस हमले में डीएसपी समेत आठ पुलिस वाले शहीद हो गये. जबकि अन्य सात पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं. वहीं दो अपराधियों के भी मारे जाने की खबर है.

ये मामला कानपुर देहात के शिवली थाना इलाके के बिकरू गांव का है. जहां पुलिस की टीम हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई थी. मामले की जांच के लिए एसआइटी का गठन किया गया है. वहीं इस घटना को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव गृह से बात की है. वहीं इस पूरे मामले के सरगना विकास दुबे की तलाश में एक सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.

कौन है विकास दुबे

विकास दुबे का एक लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. विकास दुबे वही अपराधी है, जिसने 2001 में राजनाथ सिंह सरकार में मंत्री का दर्जा पाए संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या कर दी थी. लेकिन इस मामले में उसको सजा नहीं हो पाई थी. वहीं हाल में उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज हुआ था और इसी मामले में उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की भारी-भरकम टीम गांव गई थी.  जहां पुलिस की टीम पर प्लानिंग के साथ हमला किया गया.

विकास के खिलाफ दर्ज है 60 केस

अपराधी विकास दुबे 90 के दशक में छोटा-मोटा अपराधी हुआ करता था, लेकिन आज की तारीख में उसके खिलाफ 60 केस दर्ज हैं. साल 2000 में विकास दुबे पर कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या का आरोप लगा था. इसी साल उस पर कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र में रामबाबू यादव की हत्या मामले में जेल के भीतर रहकर साजिश रचने का आरोप लगा था.

वहीं साल 2004 में केबल व्यवसायी दिनेश दुबे हत्या मामले का भी आरोप विकास पर है. 2018 में जेल में बंद होते हुए भी विकास दुबे ने अपने ही चचेरे भाई अनुराग पर जानलेवा हमला करवाया था. इस मामले में अनुराग की पत्नी ने विकास समेत चार लोगों को नामजद किया था.
राजनेताओं का मिला है संरक्षण

भारतीय राजनीति में अपराधियों और नेताओं का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है. 90 के दशक में छोटे-मोटे केस में पुलिस विकास दुबे को पकड़कर ले जाती थी. लेकिन उसे छुड़वाने के लिए स्थानीय रसूखदार नेता विधायक और सांसदों तक के फोन आने लगते थे. विकास दुबे एक बार जिला पंचायत सदस्य भी चुना जा चुका था. वो भी जेल में रहते हुए. उसके घर के लोग तीन गांव में प्रधान भी बन चुके हैं. साल 2002 में मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए विकास दुबे ने कई जमीनों पर अवैध कब्जे किए. गैर कानूनी तरीके से काफी सारी संपत्ति बनाई. इस दौरान बिल्हौर, शिवराजपुर, रिनयां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में विकास दुबे का दबदबा था.।।

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